वाराणसी
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के तीन छात्र (श्रौत चन्द्र चतुर्वेदी, नवीन कुमार और नवनीत कुमार यादव ) दर्शन एवं धर्म विभाग के सामने बी.एच.यू. प्रशासन के खिलाफ धरना पर बैठे हुए हैं। उनकी समस्या यह है कि विभाग और परीक्षा नियंता की लापरवाही की वजह से IPR (Indian Philosophy and Religion) डिसिप्लिन की सीट सम्बद्ध महाविद्यालयों को विज्ञापित हो गयी थी जबकि यह केवल मुख्य परिसर में संचालित होता है और यह UGC Ph.D. Regulations 2022 के अनुसार भी अमान्य है।
इस लापरवाही को लेकर छात्रों ने कुलपति महोदय को 30 अप्रैल को अवगत कराया। इसके बाद से लगातार इन लोगों ने केंद्रीय कार्यालय और डीन ऑफिस का चक्कर काटा 21 मई को वीसी द्वारा आदेश विभाग को आता है की तीनों छात्रों को मुख्य परिसर में रखा जाये। परन्तु 23 मई को इस आदेश को अस्पष्ट और अपर्याप्त बताते हुए विभाग, कुलपति और परीक्षा नियंता को स्पष्टीकरण माँगा कि वहां से यह भी लिख कर आदेश दिया जाये कि पहले से Philosophy की दो खाली सीट पर दो छात्रों को Allot करे और तीसरे छात्र को विभागाध्यक्ष के निर्देशन में Allot करने का आदेश दिया जाये।
इनकी समस्या यह है कि जो Departmental Research Committee का जो कार्य है, वह परीक्षा नियंता क्यों लिख कर दे?
दूसरी बात यदि विभाग स्पष्टीकरण मांग रहा है तो अभी तक क्यों नहीं दिया। वर्तमान में स्थिति यह है कि G.P.Singh के पास यह मामला 10 दिनों से है लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है और पुनः महाविद्यालय भेजने की धमकी दी जा रही है। इसी कारण से हम मजबूरन धरना दे रहे हैं।

धरना देते छत्र।
