वाराणसी लंका क्षेत्र स्थित एक होटल में सेवाज्ञ संस्थानम् सामाजिक द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को प्रोफेसर हरेंद्र राय और शिवम पांडे ने संबोधित किया। उन्होंने बताया कि सेवाज्ञ संस्थानम् सामाजिक जीवन के समग्र क्षेत्र में कार्य करने वाला संगठन है। यह मन्त्र “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्या” मे उदघोषित विश्व बन्धुत्व के आधार पर कार्य करता है। इसके माध्यम से भाग्तीय मंग्कृति में निहित एकात्मता के संवर्धन हेतु निष्ठावान युवाओं का निर्माण करने के लिये हम प्रतिबद्ध है। युवा धर्ममैमद, धर्म-संस्कृति और गष्ट के भाग्तीय विचार को युवाओं के लिये स्पष्ट करने का एक वार्षिक उपक्रम है।
युवा धर्ममैमढ, शिकागो में दिये गये स्वामी विवेकानन्द के प्रथम वक्तव्य के पुण्य पर्व को लक्ष्य करके आयोजित होने वाला व्यापक विमर्श का अनुष्ठान है। यह युवाओं के साथ धर्म की अवधारणा पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी आमन्त्रित करता है। यह जीवन के सर्वांगीण विकास के विरोधाभासों को पहचानने, उनसे बाहर निकलने और इस प्रक्रिया में सनातन धर्म की महत्त्वपूर्ण भूमिका को सैद्धान्तिक और व्यावहारिक धरातल पर निकृपित करने का प्रयास है। धर्म की स्थापनाओं पर केन्द्रित विमर्श होने के कारण इसकी योजना पहले सप्तपुरियों में होनी है। काशी, अयोध्या, मथुरा और हरिद्वार में चार सफल आयोजनों के उपरान्त, वर्ष 2025 में यह काँचीपुरम तमिलनाडु में आयोजित हो रहा है।
मंदिरों व अपने पौराणिक महत्व के लिए प्रसिद्ध दक्षिण भारत का प्रमुख तीर्थ स्थल मोक्षदायनी कांचीपुरम है। इसकी पवित्रता शिव व विष्णु दोनों के लिए है, मान्यताओं के अनुसार देवी के दर्शन के लिए ब्रह्मा जी ने यहाँ तपस्या किया है। इसे हरिहरात्मक पुरी से भी जानते हैं। काँची शिक्षा के केन्द्र के रूप में भी विश्व प्रसिद्ध है व प्राचीन काल में चोल व पल्लव वंश की राजधानी के रूप में ख्याति रही है। भगवत्पाद श्री आदि शंकराचार्य ने स्वयं मूलनाय सर्वज्ञ पीठम शंकराचार्य मठ के रूप में श्री काँची कामकोटि पीठम की स्थापना किया था। मोक्षदायिनी यह नगरी आंतरिक आनंद के साथ धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व का महत्वपूर्ण केंद्र व तमिल संस्कृति एवं इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कांचीपुरम की साँस्कृतिक धरोहर भारत की समृद्धि सांस्कृतिक विविधता की दर्शाती है, यहाँ की कला व वास्तुकला दक्षिण भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। सप्तमोक्षपुत्रियों व एक्यावन शक्तिपीठों में से एक व सहस्त्र मंदिरी के शहर काँचीपुरम में युवा धर्म संसद का आयोजन धर्मध्वजारोहण की उत्स पताका को स्थापित करने में सहायक होगा, जो लोककल्याण, धर्मसंचार व नए धर्मयुग की खोज में एक स्वर्णसोपान संहिता का अध्याय होगा।
